Ashtami 2018 : जानिए कितनी वर्ष की कंजक  को कराया जाता है भोजन

 आखिर क्यों किया जाता है कन्या पूजन? इतने वर्ष की कंजक  को कराया जाता है भोजन

शारदीय नवरात्रि का आरम्भ जहां घर में दुर्ग मां की पूजा और कलश स्थापना

कर किया जाता है वहीं इन शारदीय नवरात्रि का अंत घर में कंजक पूजन यानि कि

कन्या पूजन कर किया जाता है। नवरात्रि में कन्या पूजन करने का बहुत बड़ा महत्व माना जाता है।

कहा जाता है कि यदि आप नवरात्रि के नौ व्रत रख रहे हैं लेकिन अगर आपने आखिर में कन्या पूजन

नहीं किया है तो आपका नवरात्रि का व्रत अधूरा ही माना जाएगा।

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इतना ही नहीं बिना कन्या पूजन के नौ दिनों में की गई देवी की उपासना का भी कोई महत्व नहीं रह जाएगा।

कन्या पूजन के दौरान कन्‍याओं के चरण को धोकर उनका पूजन करके उनको स्वादिष्ट भोजन कराया जाता है।

साथ ही कुछ द्रव्य और वस्त्र का दान किया जाता है। कन्‍या पूजन या कंजन पूजन पर

सुबह पहले महागौरी का पूजन किया जाता है। उसके बाद 9 बालिकाओं

और एक बालक को घर पर भोज के लिए बुलाया जाता है।

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इसमें पूरी, हलवा व छोले बनाने का विधान है।

इस बात का ध्‍यान रखें कि कन्या पूजन 2 वर्ष से 10 वर्ष तक की कन्याओं का ही किया जाता है।

कंजक में बालक को बटुक भैरव का रूप माना जाता है।

ऐसी माना जाता है कि भगवान शिव ने माता की सेवा के लिए हर शक्ति पीठ में बटुक भैरव को तैनात किया है।

किसी भी शक्‍त‍िपीठ में भैरव के बिना मां के दर्शन अधूरे माने जाते हैं।

इसलिए कंजक में मां के 9 स्‍वरूपों के साथ एक बालक को भी खाना खिलाया जाता है।

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